SINGLE ENTRY SYSTEM/WHAT DOES SINGLE ENTRY ACCOUNTING MEAN Is Bound To Make An Impact In Your Business

                   Single Entry System


यानी अकाउंट प्रणाली के अंतर्गत प्रत्येक लेनदेन व्यवहार के दोनों पक्ष डेबिट तथा  क्रेडिट को नहीं लिखा जाता तथा केवल व्यक्तिगत खाते एवं रोकड़ खाता यानी  Cash Account बनाया जाता है कुछ स्थितियों में व्यापारी दो स्तंभीय  रोकड बही यानी Cash Book  With Tow Columns बना लेता है जिसमें एक स्तम्भ बैंक के लेन-देनो का एवं दूसरा Cash Book से संबंधित होता है यदि कोई व्यापारी अन्य सहायक जैसे Purchase Book, Sale Book रखता है 

तब उनके लिखने की विधि तो द्वि अंकन प्रणाली के समान होती है परंतु पोस्टिंग करते समय Ledger  में केवल व्यक्तिगत खाते यानी Personal Account  ही खोले जाते हैं Impersonal Account जैसे वेतन मजदूरी किराया आदि खाताबही में नहीं दिखाए जाते यदि  500 रुपए का भुगतान के लिए किया गया है तब केवल Cash Account  को ही क्रेडिट किया जाता है Wages Account को डेबिट नही करते इसी कारण 

                      Single Account 

प्रणाली को  हीं एक अपूर्ण तथा अवैज्ञानिक प्रणाली कहा जाता है जे0 आर0 बाटलीबॉय के अनुसार एकांगी प्रणाली का आशय पुस्तपालन की उस प्रणाली से हैं जिसमें देनदारो तथा लेनदारों के केवल व्यक्तिगत खाते रखे जाते हैं कभी कभी साधारण सहायक पुस्तकें  यानी Subsidiary book उसी प्रकार रखी जाती है जैसे Double Account  प्रणाली में रखी जाती परंतु उनमें से केवल उन्हीं Account की पोस्टिंग  की जाती है Personal Account से संबंधित होते हैं वास्तव में एकांगी प्रणाली पुस्तपालन की कोई विशेष प्रणाली नहीं है बल्कि पूर्ण रूप से दोहरा लेखा प्रणाली ही  है 


                     इकहरी लेखा प्रणाली के दोष 
        Faults of single accounting system

1. इस प्रणाली में लेनदेन के दोनों पक्षों का लेखा नहीं किया जाता अतः तलपट नहीं बनाया जा सकता इस प्रकार गणितीय शुद्धता की जांच नहीं की जा सकती 

2. संपत्ति खाते यानी property accounts नहीं बनाए जाने के कारण उन पर नियंत्रण कठिन होता है गलतियां एवं कपट की संभावना सदैव बनी रहती है /

3. वास्तविक तथा नाम मात्र खातो यानी Real and Nominal Account के अभाव में लाभ हानि खाते से शुभ लाभ या हानि ज्ञात नहीं किया जा जा सकता 

4. व्यापारी यदि अपना व्यापार बेचना चाहे तो विक्रय   मूल्य निश्चित करना कठिन होता है

5. इस प्रणाली में यदि अंतिम खाते इधर उधर से सूचना एकत्रित करके बना भी लिए जाए तो भी वह शुद्ध एवं प्रमाणिक नहीं माने जाते आयकर अधिकारी पुस्तकों की सत्यता पर  विश्वास नहीं करते हैं

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