भारत का चंद्रयान 2 चांद के आकाश में उगी हुई पृथ्वी भारत के चंद्रयान 2 से तस्वीर ली गई

              चांद के आकाश में उगी हुई पृथ्वी

भारत का चंद्रयान 2 छलांगें भरता हुआ चांद की तरफ बढ़ रहा है इस बीच क्या चांद ठहरा हुआ है नहीं वह एक साथ कई डायमेंशन में गतिशील है उसकी कम से कम 6 गतियां हम आसानी से गिनवा सकते हैं पहली चांद लगातार पृथ्वी की परिक्रमा कर रहा है औस्तन 1 किलोमीटर प्रति सेकंड की स्पीड से पृथ्वी का एक चक्कर वह 27.32 दिनों में पूरा कर लेता है

                                 
भारत का चंद्रयान 2 चांद के आकाश में उगी हुई पृथ्वी भारत के चंद्रयान 2 से तस्वीर ली गई
   

               चांद के आकाश में उगी हुई पृथ्वी


दूसरी जिस कक्षा में चांद पृथ्वी की परिक्रमा करता है वह गोल नहीं इलिप्सी है इसलिए पृथ्वी और चांद की आपसी दूरी है हर पल घटती या बढ़ती रहती है एक चक्कर के दौरान यह दूसरी बढ़ते बढ़ते 4.05 लाख किलोमीटर को छू लेती है और फिर घटते घटते 3.63 लाख किलोमीटर रह जाती है पहली स्थिति को एपोजी और दूसरी स्थिति को पैरीजी कहते हैं तीसरी जब चांद एपोजी की स्थिति में होता है तो उसकी स्पीड अपेक्षाकृत स्लो हो जाती है और जिस क्षण चांद पैरीजी की स्थिति में होता है तब उसकी स्पीड अपनी चरम सीमा को छूने लगती है


               चांद के आकाश में उगी हुई पृथ्वी


चौथी जिस पल पर चांद पृथ्वी की परिक्रमा करता है वह तल के समांतर नहीं जिस पर पृथ्वी सूरज के चक्कर लगा रही है यह दोनों तल आपस में 5.1 डिग्री का एंगल बनाए हुए एक दूसरे को दो बिंदुओं पर काटते हैं अंतरिक्ष में यह दो तल जिंदो गतिमान बिंदुओं पर एक दूसरे को काटते हैं उन्हें नोड कहते हैं


               चांद के आकाश में उगी हुई पृथ्वी


पांचवी अपनी परिक्रमा के दौरान जब चांद इन दोनों में से किसी एक नोड पर पहुंचता है तो वह पटरी बदलता है अगर वाह इक्लिपटिक पृथ्वी द्वारा सूरज का चक्कर लगाने का तल के ऊपर हो तो नीचे सरक जाता है और नीचे हो तो ऊपर सरक जाता है यानी उत्तर से दक्षिण अथवा दक्षिण से उत्तर
     
                             
भारत का चंद्रयान 2 चांद के आकाश में उगी हुई पृथ्वी भारत के चंद्रयान 2 से तस्वीर ली गई

                चांद के आकाश में उगी हुई पृथ्वी


छठी  पृथ्वी की तरह चांद भी अपनी धुरी पर लट्टू की तरह घूमता है यह बात एक बारगी अटपटी लगती है क्योंकि चंद्रमा की एक ही स्थिति में हमेशा हमारे सामने रहती है इस विशिष्ट कि गति की व्याख्या ज्वारीय बंधन के जरिए की जाती है जिसमें बड़े पिंड के इर्द-गिर्द घूम रहा छोटा पिंड अपने चेहरे को स्थिर रखकर कुछ इस तरह घूमने लगता है जैसे रस्सी से बांधा हुआ पृथ्वी 30 घंटे और 56 मिनट में अपनी दूरी पर घूमती है जबकि चांद इस काम के लिए 27.32 दिन का वक्त लेता है घूर्णन कि इस गति में जैसे पृथ्वी के दोनों ध्रुव बारी बारी से सूरज की तरफ झुकते हैं वैसे ही चांद के ध्रुव भी बारी बारी पृथ्वी की तरफ झुके झुके चलते हैं मानो अपने अपनी इष्ट देवी को सलामी दे रहे हो चांद की इन अनेक गति ओं और इंद्रियों की अनगिनत बारीकियों का लेखा जोखा रखकर ही इसरो के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को विश्वास है कि उनके द्वारा छोड़ा गया चंद्रयान 2 निश्चित समय और निश्चित स्थान पर यानी ठीक निशाने पर पहुंचेगा लेकिन बात यहीं खत्म नहीं होती कई और भी रहस्य हैं


                चांद के आकाश में उगी हुई पृथ्वी


चांद के दो चेहरे हैं एक तो वह है जिस पर पिछले करोड़ों वर्षों से एक गुड़िया बैठी चरखा काट रही है चांद का दूसरा चेहरा हम पृथ्वी वालों ने कभी देखा नहीं दरअसल भक्तवत्सल चांद ने पृथ्वी की परिक्रमा करते वक्त उसको कभी अपनी पीठ नहीं दिखाई आप भी अगर चांद की परली तरफ जाओगे तो वहां से आपको पृथ्वी नहीं दिखाई देगी chandrayaan-2 का लक्ष्य चांद का इधर वाला चेहरा है उधर वाला नहीं आइए अपने चंद्रयान के पहुंचने से पहले हम वहां का नजारा देखें यहां निर्जन और बंजर धरती पर छोटे-बड़े अनगिनत गड्ढे हैं कई जगह धूल की इतनी मोटी परत है कि उसमें आपके पैर फंस जाएंगे मजे की बात यह है कि आपके पैरों के निशान मिटेंगे नहीं मिटेंगे कैसे चांद पर ना हवा है ना पानी है जो उन्हें मिटाएगा यहां का आसमान नीला नहीं काला है दिन में भी काला और रात को तो और भी काला


             चांद के आकाश में उगी हुई पृथ्वी



चांद का एक दिन यानी सूर्योदय से लेकर अगले सूर्योदय तक पृथ्वी के 29.53  दिनों के बराबर होता है यूं कहे की पृथ्वी के लगभग 1 महीने के बराबर लगभग 15 दिनों की रोशनी और 15 दिनों का अंधेरा यहां पृथ्वी की तरह की सुबह और शाम नहीं होती पृथ्वी पर तो सूर्य के उदय होने से 30 40 मिनट पहले ही इतना उजाला होता है कि अखबार पढ़ लो और सूर्य के अस्त होने के 30 40 मिनट बाद तक बिना बत्तियां जलाए ड्राइविंग कर लो यहां चांद के काले आकाश में यह सुविधाएं उपलब्ध नहीं है


                चांद के आकाश में उगी हुई पृथ्वी             


बस स्विच ऑन और स्विच ऑफ सूरज की पहली किरण से तुरंत पहले और उसकी आखिरी किरण के तुरंत बाद घुप अंधेरा इसरो के वैज्ञानिकों ने इसी हिसाब से रोवर प्रज्ञान का कार्यकाल 14 दिन का ही सुनिश्चित किया है चांद की इधर वाली साइट पर रात के समय आकाश में आपको वे सभी तारे दिखाई देंगे जो पृथ्वी के आकाश में दिखाई देते हैं हां इन तारों के बीचो बीच आपको एक विशाल चंदा दिखाई देगा

                         
भारत का चंद्रयान 2 चांद के आकाश में उगी हुई पृथ्वी भारत के चंद्रयान 2 से तस्वीर ली गई

              चांद के आकाश में उगी हुई पृथ्वी


यह चंद्रमा इतना भारी भरकम है कि उसके पीछे साथ-साथ रखे 4 सूरज छुप जाएं या खास चंद्रमा यहां के आकाश में उदय अस्त नहीं होता जहां है वही टिका रहता है वही टीके टीके उसकी कलाई बदलती रहती हैं अमावस अष्टमी गुरु पूर्णिमा  अष्टमी और फिर अमावस पूर्णिमा के अवसर पर तो या चंदा इतना रोशन होता है कि उसकी उपस्थिति में कोई तारा दिखाई नहीं देता उसकी रोशनी में आप आसानी से कोई किताब पढ़ सकते हैं वास्तव में या चंद्रमा हमारी अखंड पृथ्वी है आप चाहे तो प्यार से इसे पृथ चंदा बुला सकते हैं एक बात और अगर आप चंदा की दूसरी साइट पर गए होते तो आपको वहां के आकाश में पृथ चंदा दिखाई नहीं देता आशा है अगले महीने जब हमारा चंद्रयान तू चांद की इधर वाली साइट पर उतरेगा तब व अन्य आवश्यक कार्यों से कुछ समय चुराकर पृथ चंदा कि कुछ प्यारी प्यारी तस्वीरें  खींचेगा

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